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5 वर्षों में 3 से 23 बिलियन हुआ “आयुष मार्केट”
दुबई में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आयुष सम्मेलन में ज्वाइंट सेक्रेटरी विश्वजीत कुमार सिंह ने दी जानकारी
इंदौर। पारम्परिक चिकित्सा पद्धतियों पर लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। अब हमें एक ऐसे होलिस्टिक अप्रोच को अपनाने की जरूरत है, जिसमें दुनिया भर की तमाम नई और पुरानी चिकित्सा पद्धतियों के समन्वित सहयोग से कम समय में मरीजों को जल्द से जल्द ठीक कर उन्हें स्वस्थ एवं सुखी जिंदगी का वरदान दे सकें। प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी जी ने आयुष मंत्रालय की स्थापना कर “सर्वे सन्तु निरामयाः” के सूत्रवाक्य को चरितार्थ करने का प्रयास किया है।
ये बात विदेश राज्य मंत्री, वी. मुरलीधरन ने दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित तीन दिनी द्वितीय अंतरराष्ट्रीय आयुष सम्मेलन-2024 में कही। इस मौके पर मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी विश्वजीत सिंह ने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धतियों की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि महज 5 वर्षों में आयुष मार्केट 3 से बढ़कर 23 बिलियन हो गया है। इस सम्बन्ध में हम दुनिया के 23 देशों के साथ एमओयू भी साइन कर चुके हैं।
खासतौर पर नॉन कम्युनिकेबल डिजीज पर नियंत्रण की दिशा में समुचित प्रयास करने के उद्देश्य से आयोजित इस सम्मेलन में केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय (भारत सरकार) में वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य एवं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कार्यपरिषद सदस्य तथा दुनिया के जाने-माने होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. एके द्विवेदी ने अप्लास्टिक एनीमिया जैसी जानलेवा बीमारी पर अपनी रिसर्च साझा करते हुए “होम्योपैथिक ट्रीटमेंट ऑफ अप्लास्टिक एनीमिया” जैसे अत्यन्त गम्भीर विषय पर अपनी बात रखी।
समन्वित प्रयासों से भविष्य में हमारी सफलता की दर
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि, मैंने होम्योपैथिक के पारम्परिक और नवाचार-युक्त ट्रीटमेंट्स के जरिए अब तक अनेक पेशेंट्स का सफल उपचार किया है और उम्मीद है कि समन्वित प्रयासों से भविष्य में हमारी सफलता की दर और बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज से हर साल लगभग 41 मिलियन लोगों की मौत होती है, जो वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल मौतों का 74% है। इस मौके पर संयुक्त अरब अमीरात में भारत के अन्य प्रदेशों से आये होम्योपैथिक चिकित्सक तथा बी के शिवानी दीदी समेत 30 देशों के लगभग 1200 विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
डॉ. ए.के. द्विवेदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश से डॉ. एस.पी. सिंह, प्राचार्य, एस.के.आर.पी. गुजराती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, इंदौर एवं डॉ. डी.एन. मिश्रा, प्राचार्य, शिवांग होम्योपैथिक मेडिकल काॅलेज, भोपाल ने भी कॉन्फ़्रेंस में होम्योपैथी इलाज पर अपने सम्बोधन दिए।


